शहीदों और सैनिकों के सम्मान की बात किस मुंह से …


( यह आलेख 5 दिसम्बर को लिखा गया था तब से अब तक वस्तुस्थिति में कोई परिवर्तन नहीं प्रतीत हो रहा है. यह अवश्य है कि राष्ट्रीय नेतृत्व जम्मू कश्मीर में अपनी संयुक्त सरकार बना लेने की प्रसन्नता के अतिरिक्त इस आलेख द्बारा पूर्व में व्यक्त की गयी संभावनाओं की ओर बढ़ता प्रतीत हो रहा है. आइये नववर्ष में ईश्वर से प्रार्थना और कामना करें कि ऐसा न हो और राष्ट्र इस बार आतंक के प्रति द्रढ़ता दिखा सके )

शहीदों और सैनिकों के सम्मान की  बात किस मुंह से … !!

क्या आप में से किसी ने …. कभी रेलवे स्टेशन पर रिजर्वेशन कराने के लिए गए हुए किसी सैनिक के साथ रिजेर्वेशन करने वाले क्लर्क का अपमान भरा वर्ताव देखा है? बड़े बड़े शब्दों में देशभक्ति और सैनिकों के कल्याण का दावा करने वाले राजनीतिक और कार्यालयों में कार्य करने वाले जनता के लोग, सैनिकों के आत्मसम्मान को बहुधा ठेस पहुँचाने से भी परहेज नहीं करते। यह जो चार दिनों के लिए देश और शहीदों के नाम का जज्बा है समुद्र में आया तूफ़ान नहीं है……. शायद यह भी चाय की प्याली मैं आए तूफ़ान की तरह बैठ जाएगा … आज का राजनेता भी यह बहुत अच्छी तरह जानता है और मीडिया भी।
उंगली पर गिने चुने एक या दो चैनेल को छोड़ दिया जाए तो सभी को पता है कि बहुत दिनों तक इसके सहारे टी आर पी नहीं बढ़ाई जा सकेगी। इसलिए बहती गंगा में जितना हाथ साफ़ कर सकते हो कर लो ……
संभवतः ताज होटल से सुरक्षित बाहर आने वाले एक सांसद का मीडिया पर बयान लोग अब तक नहीं भूल सके होंगे। इन महोदय ने मीडिया पर आते ही शेखी बघारते हुए कहा था कि वो तो योद्धा हैं डर कैसा .. ? वह तो अपने लैपटाप पर ‘एन्जॉय’ करते रहे। इन ‘स्वयंभू बहादुर’ नेता जी से क्या कोई पूंछना चाहेगा कि आतंकवादियों के आते ही दरवाजा क्यों बंद कर दिया….!!!! ? उन्हें बहादुरी से मुकाबला करना चाहिए था … अथवा अपने प्रेरक भाषण से आतंकवादियों का हृदय परिवर्तन करने के लिये प्रयास करना चाहिए था। देश का दुर्भाग्य है कि यदि ऐसे राजनीतिक, नकली शेर योद्धा हैं तो फिर अमर शहीद मेजर उन्नीकृष्णन, हवलदार गजेंदर, हेमंत करकरे सहित अन्य बलों के अमर शहीद क्या हैं ….
माइक और कैमरा देखते ही शेर बन जाने वाले नेता जी संभल जाइये। देश की जनता को बहुत ही दुःख और पीड़ा पहुंचा चुके हैं आप ……… देश की जनता से यही निवेदन है कि किसी भी सैनिक के लिये सच्चे सम्मान से अधिक बड़ा प्रतिकार कुछ भी नहीं हो सकता है किंतु यह कुछ पलों का न होकर स्थाई बना रहे यही शहीदों के और उनके परिवारों के लिए सच्ची श्रृद्धांजलि होगी।
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