चुनाव के नाम पर न कोई ’खंडिस्तान’ चाहिये [कविता] – श्रीकान्त मिश्र ‘कान्त’

हिन्दू न ढूँढ़ता हूँ मैं.. न मुसलमान चाहिये
पहचान ढूँढ़ता हूँ बस.. पहचान चाहिये
हिन्दू मिले और बौद्ध जैन सिख मिल गये
अगड़े मिले पिछड़े मिले पर ‘हम’ ही रह गये
कोई पूछने लगा क्या सवर्ण हो तुम..?
मण्डल और कमण्डल की ना दुकान चाहिये
पहचान ढूँढ़ता हूँ पहचान चाहिये

तुम भाजपाई हो या फिर काँग्रेसी हो
कम्युनिस्ट सोशलिस्ट या फिर जनता दल के हो
द्रमुक, लीग, अन्ना संग गोरखाली मिल गये
लेकिन प्रभो…!
मुझको तो एक अदद इंसान चाहिये
पहचान ढूँढ़ता हूँ पहचान चाहिये

कन्नडिगा तमिल तेलगू गुजराती मैं नहीं
सिंधी पंजाबी या बंगाली मैं नहीं
कश्मीरी कौन है आसामी मैं नही
गोरखाली फिर मलयाली या मराठी भी नहीं
अरे बाबा कान पकड़ता हूँ…… !
चुनाव के नाम पर न कोई ’खंडिस्तान’ चाहिये
अपने नाम के साथ सारा हिन्दुस्तान चाहिये
पहचान मेरी है यही बस ये पहचान चाहिये.

Advertisements

3 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. Kanishka Kashyap
    मई 02, 2009 @ 18:49:00

    Thats fantastic.. mindblowing articulation…चुनाव के नाम पर न कोई ’खंडिस्तान’ चाहियेअपने नाम के साथ सारा हिन्दुस्तान चाहियेपहचान मेरी है यही बस ये पहचान चाहिये. that should be the spirit..

    प्रतिक्रिया

  2. अविनाश वाचस्पति
    मई 03, 2009 @ 16:51:00

    जो हम रह गएवे ह से हिन्‍दूम से मुस्लिमकहानी कह गए।जो खंडिस्‍तान नहीं चाहिएचुनाव की नावमें वही बाकीहैं रह गए।नाव चुनाव कीखंडिस्‍तान कीतेज रवानगी हैतिश्‍नगी है।जो नहीं चाहिएमिलेगा वहीजो चाहिए वोमिलेगा नहीं।

    प्रतिक्रिया

  3. Anonymous
    मई 28, 2009 @ 08:41:11

    kavita bhut hi sundar avm bhav purn hai

    प्रतिक्रिया

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: