हाँ। मै सचिन को भारत रत्न देने का विरोधी हूं ..[ आलेख] – शिवेन्द्र कुमार मिश्र

जीवन्त मिथक। मीडिया के शब्दों में कि्रकेट का भगवान। इस भगवान के प्रति मीडिया द्वारा निर्मित दीवानगी देखिए कि जब कि्रकेट विश्वकप हो रहा था तो मीडिया लगातार दोहरा रहा था कि टीम इणिडया” को सचिन के लिए विश्वकप जीतना है न कि ”भार के लिए,हिन्दुस्तान के लिए।” वैसे सच कहू तो इस देश में जीत,पुरस्कार सब कुछ इणिडया के लिए है भारत अथवा हिन्दुस्तान के लिए तो सरकारी योजनाए, धारा 144 पुलिस की लाठी,गोली और सत्ताधीशों का बलात्कार ही हिस्से में आता है।

अब वही मध्यमवर्गीय समाज के ध्वजावाहक सचिन को भारत को भारतरत्न देने का दबाब बना रहा है। सचिन सचिन हैं तमाम पुरस्कारों से ऊपर किन्तु भारत 121 करोड लोगों का जीता जागता मुल्क है। कि्रकेट के रिकार्ड बुक के पन्ने सचिन के नाम से भरे जाते है। तो हमें गर्व होता है। लेकिन गर्व तो हमें कपिलदेव के नाम पर भी होता है। जो पहला कि्रकेट विश्वकप देश के लिए अपनी कप्तानी में जीत कर लाए। कैप्टन ध्यानसिंह जो राष्ट्रीय खेल हाकी के शेर कहे जाने के हकदार है। वह भी इस तरह से भारत रत्न के हकदार है। और हा यदि किसी खेल की विश्व रिकार्ड बुक के पन्नों पर नाम अंकित कराना भारतरत्न का हकदार बनाता है तो भारत कंलक पुरस्कार की शुरूआत भी करनी चाहिए। वैसे न सही किन्तु जब ओलिमिपक खेलों में हम चुल्लू भर पानी भ डूब मरने का नही ढूंढ पाते उस समय शायद भारत कंलक पुरस्कार का सही पात्र मिल सके।

इस देश की आजादी के लिए जिन्होनें पूरे परिवारों सहित अपनी जिन्दगी जेलों में गुजार दी हसते हसते फासी के फन्दें चूम लिए जिन्होने ” खुश रहो अहले-वतन हम तो सफर करते है। जैसी आवाज देकर मातृभूमि पर प्राण न्यौछावर कर दिय। क्या ऐसे अमर सपूतों के प्रति पुरस्कार देकर देश अपनी कृतज्ञता ज्ञापित कर चुका है जो कि्रकेटर भारत रत्न के लिए चुने जाने है। सावरकर बुधं,चाकेकर बंधु,राचीन्यनाथ सान्याल,राजेन्द्र लोहिडी,सरदार भगत सिंह,सरदार अजीत सिंह,मदनलाल धीगडा,मैडम कामा,श्री मति ऐनी बेसेन्ट,लोकमान्य तिलक,पं0 चन्द्रशेखर आजाद,पं0 रामप्रसाद बिसिमल,शहीद अशफाक उल्ला खा,नामों की इतनी लम्बी सूची कम पड गर्इ। ये वे नाम है जो किसी रिकार्ड बुक में नही चढे किन्तु जिन्होने अपने रक्त की एक-एक बूंद इस देश की जनता को समर्पित कर दी न कि एक-एक रन के लिए करोडों रूपये अपनी तिजोरी में जमा किए।

मित्रों भारत की आजादी के दीवानों से अगर आपको नफरत है तो मेजर जनरल जगजीत सिंह अरोडा को याद कर लीजिए जिन्होने 1971 में बांग्लादेश में पाकिस्तान की 1 लाख के लगभग सेना को आत्मसमर्पण करने को वाहय कर दिया। आज तक के सैनिक इतिहास में इससे बडा आत्मसमर्पण कभी नही हुआ।भारत के पास विज्ञान के क्षेत्र में भी वर्गीश जैसे लोग है जिन्होने हरित क्रानित कर भारत की विशाल जनसंख्या को खाधान्न सुरक्षा प्रदान की। न्यायमूर्ति पी0एन0 भगवती जिन्होने जनहित याचिका की अवधारणा को मूर्तिवान किया। आज तमाम भ्रष्टाचार इन जनहित याचिकाओं के माध्यम से ही खुला है। श्री अन्ना हजारे जिनके प्रयासों से सूचना अधिकार अधिनियम लागू किया गया और आज जो एक तरह की क्रानित का रूप ले चुका है। योगर्षि बाबा रामदेव जिनके योग और प्राणायाम ने करोडों लोगों के जीवन को बदल दिया और चिकित्सा के क्षेत्र में क्रानित पैदा कर दी। भारत में आर्इ0टी0 क्रानित के जनक सैम पित्रोदा, उदारवादी अर्थव्यवस्था को भारत में तेज गति प्रदान करने वाले श्री पी0वी0 नरसिम्हाराव,”सुलभ शौचालय की अवधारणा प्रदान करने वाले श्री विदेश्वरी दुबे। मेरा आशय है कि ऐसा कोर्इ भी नाम जिसने इस देश के करोडों लोगों के जीने के ढंग को शानदार और जानदार बनाने में योगदान दिया हो वह ”भारत रत्न का हकदार होना चाहिए। जिसने भय भूख अशिक्षा और गरीबी से करोडों भारतीयों को उबारने का प्रयत्न किया हो ”भारत रत्न का हकदार होना चाहिए। पदम पुरस्कारों में व्यवसायी और भारतरत्न में कि्रकेटर। तो इन राष्ट्रीय पुरस्कारों के अगले दावेदार,पूनम पाण्डेय,मलिलका शेरावत,नही हो सकते।

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4 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. भारतीय नागरिक - Indian Citizen
    अगस्त 07, 2011 @ 18:15:08

    ऐसे लोगों से टीआरपी कहां मिलेगी सरका्र को..

    प्रतिक्रिया

  2. S.N SHUKLA
    अगस्त 11, 2011 @ 11:12:45

    behatar aur bebak,bahut sundar

    प्रतिक्रिया

  3. DR. ANWER JAMAL
    अगस्त 14, 2011 @ 06:52:33

    Nice post.

    प्रतिक्रिया

  4. एक स्वतन्त्र नागरिक
    अगस्त 23, 2011 @ 17:28:03

    सचिन भारत रत्न के लायक नहीं है. इस विषय पर तार्किक एवं दिमाग खोलने वाला आलेख पढ़े. http://sachin-why-bharat-ratna.blogspot.com

    प्रतिक्रिया

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