दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल .. हाय रे द्विवेदी तूने क्या कर दिया [गीत] – शिवेन्द कुमार मिश्र

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के सम्मान में एक गीत लिखा गया। “दे दी हमें आजादी बिना खडग बिना ढाल साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल ” किन्तु यह अर्ध सत्य पूर्णतया राजनीति से प्रेरित है। हमें देश के स्वतंत्रता आन्दोलन में पूज्य बापू के चमत्कारी नेतृत्व पर कोई एतराज है नहीं है। और न ही आजादी के आन्दोलन में उनके योगदान पर हमारे मन में कोई संशय है। हमें आपत्ति मात्र यह है कि यह गीत अथवा इसके जैसे अन्य गीत, आख्यान, उपाख्यान अथवा इसके जैसे अन्य गीत, जो इतिहास को कल्पना में बदल देते है। स्वतन्त्रता संग्राम के महान इतिहास के पटल से यतार्थ संघर्ष को खत्म सा कर देते है। और तमाम स्वतंत्रता इतिहास में अजर अमर हुतात्माओं की अमरगाथा अनगिनत नायकों को बेगाना कर देते है। शिवेन्द्र कुमार मिश्र का प्रस्तुत गीत कविवर श्री सोहनलाल द्विवेदी के उसी गीत की पृष्ठ्भूमि मे प्रत्युत्तर स्वरूप लिखा गया है। और इतिहास के हमारे अनगिनत अनजाने क्रान्तिकारी नायकों को विनम्र श्रद्धाजंलि है। गीत बडा हो गया है:- किन्तु बलिदान की गाथा और उसका इतिहास भी छोटा नहीं है। – श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’

  हाय रे ! द्ववेदी तूने क्या कर दिया,
देश के इतिहास को बदनाम कर दिया।
कहा पढ लिया था तूने यह रास-रंग,
दे दी हमे आजादी,तलवार बिना जंग।
रक्त के भी बिना कही जन्म होता है,
प्रसव वेदना ही मा को गर्व होता है।
हाय रे। तूने क्या कमाल कर दिया,
देश के इतिहास को बदनाम कर दिया।

530बी0सी0 जरा याद तो करो
डेमासित्र्रयस आक्रमण याद तो करो
पंजाब तक भारत को बरबाद कर दिया।
व्यर्थ सब हमारा बलिदान कर दिया
326 बी0सी0 भूले न होगें
सिकंदरी आतंक भूले न होगें
झेलम ने उसका शौर्य सब बरबाद कर दिया।
भारत ने उसे जीवन से आजाद कर दिया।
हाय रे द्वि वेदी तूने क्या कर दिया।

युवा बाल वृद्ध सभी शस्त्रपाणि थे
वापसी में उसके सभी महाकाल थे
बेटियों ने देश की कमाल कर दिया
तीर से सिकन्दर का प्राणान्त कर दिया।
हाय रें। द्वि वेदी तूने क्या कर दिया
देश के इतिहास को बदनाम कर दिया।

और क्या कहू मैं सेल्यूकस का शौर्य
बेटी दी प्राण बचा,रहा कही और
नन्द का निरकुंष राज्य नष्ट कर दिया
विश्व को सम्राट प्रथम चन्द्रगुप्त दिया।
हाय रे द्वि वेदी तूने क्या कर दिया
देश के इतिहास को बदनाम कर दिया

देश के दुर्भाग्य ने डाका दिया डाल
कासिम के इस्लाम ने कर दिया बबाल
नृशंसता का उसने नंगा नाच वो किया
25000 एक दिन में कत्ल कर दिया
मा बेटियों का शील भंग दुष्ट ने किया
पहली बार देश में जौहर तब हुआ
कासिम को खलीफा से मरवा कर दम लिया
बेटियों ने देश की कमाल कर दिया।
हाय रें। द्वि वेदी तूने क्या कर दिया
देश के इतिहास को बदनाम कर दिया।

16 बार हमने गौरी को हराया
दया क्षमा करके उसने प्राण बचाया
एक बार धोखे से दुष्ट वो जीता
आखे फोड पृथिवी का प्राण ले लिया
दुष्टों के संग दुष्टता जब हमने भुलाया
पृथिवीराज चौहान सा हाल करवाया।
हाय रे। द्वि वेदी तूने क्या कर दिया।
देश के इतिहास को बदनाम कर दिया।

तुम जैसे कायर ही थे सोमनाथ में,
करते कापुरूष भरोसा चमत्कार में।
शिव देगें दण्ड कहकर भीम को रोका
दुष्ट गजनवी ने सोमनाथ तब तोडा
कैसे भूल गए तुम,राणा,शिवा,प्रताप
छत्रसाल,गुरूगोविन्द,वन्दा का प्रताप
पदमनी का जौहर कैसे तुमने भुलाया
अजुर्न,गुरू तेग का बलिदान भुलाया
भूषण की वाणी को बदनाम कर दिया
हाय रें। द्वि वेदी तूने क्या कर दिया।

1757 में प्लासी का मैदान
लिख गया अग्रेजों को भारत का विधान
1857 प्रथम स्वतंत्र ता संग्राम
रक्त से तब लिख दिया आजादी का पैगाम
पलासी से भी अब दिन तक
हम चुप्प न बैठे
कदम-कदम छिडके हमने
रक्त के छीटें।
रक्त के इतिहास को गुमनाम कर दिया।
देश के इतिहास को बदनाम कर दिया।

आजादी के संग्राम को कुछ वक्त न बीता
सन्यासियों ने युद्ध का आवाहन कर दिया
श्री बंकिम चन्द्र ने लिखा आनन्द मठ
वन्दे मातरम राष्ट्रगीत देश को दिया
मैडम कामा श्यामवर्मा और अजीत सिंह
ब्रिटिश इण्डिया हाउस बना क्रानितयों का गढ
धींगडा,भगतसिंह या बटुकेश्वर दत्त
राजगुरू,सुखदेव,अरविन्द सा या संत
सावरकर ने शौर्य का इतिहास नव रचा
चटगाव काण्ड तभी सूर्यसेन कर गया
हाय रे द्वि वेदी तूने ये क्या कर दिया।

बंगभंग से भी उपजा जो आक्रोश
स्वदेशी बना तब क्रानितयों का जोश
भारतीय टमटम मैडम ए नीबेसेन्ट
श्री तिलक ने आंदोलनों का कर दिया प्रारम्भ
काकोरी हो या साण्डर्स या आजाद हिन्द
असेम्बली के बम से गूजा सर्वत्र जय हिन्द
46 में नेवी ने भी विद्रोह कर दिया
अंग्रेजो का बिस्तर तब गोल कर दिया
हाय रे द्वि वेदी तूने ये क्या कर दिया।
ूने क्या लिख दिया
साबरमती के संत तुझको है मेरा नमन
किन्तु बलिदानों का न करों अवनमन
रक्त की भवानी ने मूल्य बहु लिया
तब जाकर देश यह आजाद है हुआ
आप सबको है हमारा कोटिश नमन
वंदे मातरम बोलो वंदे मातरम।।

शिवेन्द्र कुमार मिश्र
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2 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. भारतीय नागरिक - Indian Citizen
    अगस्त 15, 2011 @ 03:39:51

    vah geet bhi kamaal ka hai, isse inkaar nahi kiya ja sakta aur aisa bhi nahi hai ki us geet ke likhne maatra se shaheedon ki shahadat kam ho gayi.. aadarniya dwivedi ji ko hamare shaheedon par bhi geet likhne chahiye the.. aur ye sohan lal dwivedi ji nahi the, ram chandra dwivedi "pradeep" the…

    प्रतिक्रिया

  2. S.N SHUKLA
    अगस्त 15, 2011 @ 07:11:26

    सुन्दर रचना, बहुत सार्थक प्रस्तुति , स्वाधीनता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें .

    प्रतिक्रिया

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