प्रणाम अन्ना प्रणाम युवाभारती … जय हिन्द [इतिहास] – श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’

अन्ना के ऐतिहासिक जनलोकपाल आन्दोलन के लिये विगत 12 दिनों से चले आ रहे अनशन की समाप्ति की घोषणा का वह ऐतिहासिक पल अभी कुछ समय पूर्व ही भोगा है। अपार जन समूह और मेस में टी वी के सामने बैठे हुये सैनिकों के समूह जब राष्ट्रगान की टी वी पर की जाने वाली अपील पर अन्ना की सावधान की आवाज पर सावधान मुद्रा में खड़े होकर टी वी की ध्वनि के साथ साथ जनगण मन गा रहे थे तो किसी को भी रोमांच होना स्वाभाविक ही है… भोगा है पल पल इस इतिहास को और जिया भी है।

जय हो भारतीय गणतंत्र और अन्ना के अहिंसात्मक आन्दोलन की। 12 दिन ….. और कहीं कोई हुड़्दंग नहीं। वह भी तब जब कि व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर मिस्र और सीरिया सहित हमारे पड़ोस में भी निरीह जनता का रक्त सड़कों पर रक्तपात से बह रहा हो। भारतीय युवा तुम्हें नमन …… जे पी के आन्दोलन का यह सक्रिय युवा विद्यार्थी आज आप पर गर्व करता है।

नमन तुम्हारी अनथक उर्जा को और तुम्हारे धैर्य सहित भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की जिजीविषा को। 

प्रणाम अन्ना ………..  प्रणाम भारती … जय हिन्द।
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3 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. Anonymous
    अगस्त 27, 2011 @ 17:26:51

    Its very truly said and i support u sir!!!!!!!!!!!

    प्रतिक्रिया

  2. DR. ANWER JAMAL
    अगस्त 28, 2011 @ 02:53:15

    आपने बहुत अच्छा व्यक्त किया अपनी भावनाओं को।इन्हीं दिनों श्री महेंद्र श्रीवास्तव जी के लेख पर व्यक्त अपने विचार को यहां रखना चाहूंगा ताकि लोग जान लें कि अन्ना के साथ हम जैसे लोग क्यों हैं ?विदेशी हमले से तुलना करना सरासर नाइंसाफ़ी है‘प्रधानमंत्री सच्चे आदमी हैं।‘जो आदमी अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए मंत्रियों को देश की पीठ में छुरा भोंकते हुए देखता रहे, वह सच्चा आदमी कैसे हो सकता है ?‘उनके पास भ्रष्टाचार ख़त्म करने के लिए कोई जादू की छड़ी नहीं है।‘अर्थात उनके पास समस्या का कोई प्रभावी हल नहीं है। निकम्मा होना इसी को कहा जाता है। अगर आप निकम्मे हैं तो आपकी सच्चाई को चाटना है क्या ?…तो भाई फिर यह कुर्सी क्यों घेरे बैठे हो ?जिसके पास हल हो, उसके लिए छोड़कर एक तरफ़ हटिए न।‘जब कसाब को ही इस देश में फांसी नहीं दी जा रही है तो फिर भ्रष्टाचारियों को फांसी कैसे दी जा सकती है ?‘जनाब जनता भी तो यही सोचकर हैरान है कि जब कसाब को ही सज़ा नहीं हो पा रही है तो हमें हमारे शहर के माफ़िया से कौन बचाएगा ?इसीलिए तो वह भ्रष्टाचारियों को फांसी की मांग कर रही है। इसमें देशवासियों की क्या ग़लती है ?आप फांसी नहीं देना चाहते तो उम्र क़ैद दीजिए, उम्र क़ैद नहीं देना चाहते तो 7 साल की सज़ा तो दीजिए लेकिन तुरंत दीजिए।नक्सलवादियों की लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि उनकी अदालतों में यह तमाशा नहीं होता। केवल न्याय होता है और तुरंत होता है। जहां-जहां नक्सलवादियों की अदालतें लगती हैं वहां की सरकारी अदालतें ख़ाली पड़ी हैं और वकील बैठे हुए क़िस्मत को रो रहे हैं कि किसी की ज़िंदगी से खेलने का कोई मौक़ा हाथ ही नहीं आ रहा है।हमारी अजीब आफ़त है कि नक्सलवाद की तारीफ़ भी नहीं कर सकते और हिंदुस्तानी इंसाफ़ को दोष भी नहीं दे सकते लेकिन ज़ुबानों पर ताले लगा देने से सच बदल नहीं जाएगा।मैं अदालतों से मायूस हो चुका हूं . जो भी एक बार अदालत का तजर्बा कर लेता है वह इंसाफ़ से हमेशा के लिए मायूस हो जाता है बिल्कुल मेरी तरह।आप किसी भी अदालत में जाइये और अपनी बहन-बेटी के साथ इंसाफ़ की आस में भटक रहे लाखों लोगों में से किसी से भी पूछ लीजिए, मेरी बात की तस्दीक़ हो जाएगी।हिंदुस्तानी इंसाफ़ का काला चेहरा Andha Qanoon‘आपको अन्ना की बात पर हंसी आती है।‘आपको तो रोना आना चाहिए था अपने देश के नेताओं के शर्मनाक रवैये पर।‘अन्ना की पढ़ाई तीन दर्जा तक हुई है और उनके साथ जो लोग हैं उनके बारे में सबको पता है।‘कबीर की पढ़ाई तो तीन दर्जा तक भी नहीं हुई थी लेकिन उनकी बातों की सच्चाई की क़ायल पूरी दुनिया है। यहां अन्ना की एकेडैमिक क्वालिफ़िकेशन को इज़्ज़त नहीं दी जा रही है बल्कि इस बात को सराहा जा रहा है कि जिन लोगों ने दर्जा 30 तक पढ़ाई कर रखी है वे जनता के मन की बात कहने के बजाय सुविधाजनक नौकरी के लिए अपना ज़मीर बेचकर बैठ गए हैं और अन्ना ने सारे गुंडे बदमाशों के आक़ा नेताओं से पंगा ले लिया और यक़ीनन यह बिना फ़ायदे वाला काम कोई पढ़ा लिखा तो कभी करेगा ही नहीं।क्या उनके साथ में रेलवे ट्रैक उड़ाने वाले मुजरिम हैं ?क्या पता है उनके साथ के लोगों के बारे में ?बात साथियों के चरित्र और शिक्षा की नहीं है बल्कि बात यह है कि जो जितना बड़ा नेता है वह उतना ही बड़ा भ्रष्टाचार करता है। प्रधानमंत्री लोकपाल को मंज़ूर करायें और फिर सबसे पहले अपनी जांच करायें।अगर वे सच्चे हैं तो जांच में सब सामने आ ही जाएगा, घबराते क्यों हैं ?संसद में चोर न छिपे हों तो बाहर कोई हल्ला क्यों मचाएगा ?विदेशी हमले से इस जायज़ मांग के प्रदर्शन की तुलना एक अतिवाद महज़ है। किसी मोह में इस तरह की अन्यायपूर्ण बात आदमी लिख बैठता है लेकिन उसे देखना चाहिए कि वास्तव में सत्य क्या है ?…और सत्य यह है कि इस देश को जितना नेता लूट रहे हैं उतना कोई और नहीं लूट रहा है। उनके अलावा भी जो सरकारी अफ़सर जहां लूट रहा है, वह भी उनकी शह पर ही लूट रहा है।अब जो अन्ना से ज़्यादा पढ़ा लिखा हो वह देश के लिए अन्ना से बेहतर करके दिखाए।धन्यवाद !

    प्रतिक्रिया

  3. DR. ANWER JAMAL
    अगस्त 28, 2011 @ 02:56:22

    Article ka link yh hai :-http://hbfint.blogspot.com/2011/08/blog-post_767.html

    प्रतिक्रिया

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