राम मिथ या इतिहास…भाग – 3 [आलेख] – शिवेन्द्र कुमार मिश्र

….हमें अपनी प्राचीनतम हिन्दू संस्कृति पर इसलिये सदैव गर्व रहा है कि हम कूप मण्डूक नहीं रहे हैं। ज्ञान की पिपासा को शांत करने के उद्देश्य से स्वस्थ चिन्तन मनन एवं मर्यादापूर्ण सहिष्णु शास्त्रार्थ हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग रहे हैं। इसी के आलोक में ..विचार करते हुये हमें ध्यान है कि मर्यादा पुरूषोत्तम राम सदैव हमारे आराध्य देव हैं .. राम के बिना हम भारतीय संस्कृति की कल्पना भी नहीं कर सकते।सहस्त्रों वर्षों से भगवान राम के विषय में अधिकाधिक जानने की उत्कंठा हमारे मन में रही है। अनेक ज्ञानी महानुभावों ने अपने अपने ढंग से यह प्रयास किया है। किन्तु एक साधारण मानव मस्तिष्क में कुछ सहज प्रश्न उठने स्वाभाविक हैं । इस आलेखमाला का उद्देश्य यही है कि इन बिन्दुओं पर बिना किसी पूर्वाग्रह के मात्र तथ्यों के आलोक में एक स्वस्थ चिन्तन करें। आपके विचार और तथ्यपूर्ण आलोचना के लिए अग्रिम आभार – तृषाकान्त

(3) अश्व बनाम गदहा ?
विकीपीडिया इनसाइक्लोपीडिया हमें जानकारी देता है कि गधे लगभग 5000 वर्ष से 4000 वर्ष में इजिप्ट या मेसोपोटामिया में पालतू बनाये गये और फिर वहां से सारे संसार में फैल गये। ’गदहा’ अश्व परिवार का पालतू जानवर है। घोड़े को संभवतः 3000 वर्ष से 4000 वर्ष में पालतू बनाया गया।

(Horse – Introduction – Nature – October /  November – 2008 & June – 2010) (www.pbs.org.wnte/ nature/ episode/ horses/ introduction equine evoluation – The history of the horses and pony – By Kate Hinton Equus – Cabalus)
लगभग 55 मिीलयन वर्ष पूर्व एक छोटा प्राणी था जिसे Hyracotherium कहा जाता था। इसका आकार लगभग Terrier की तरह था और सारे समय इसका विकास घोड़े की तरह होता रहा। लगभग 5 मिलियन वर्ष पूर्व Equus का विकास Dino hippus के संबंधी वर्ग की तरह हो गया था। Equus का आकार मध्यम आकार के गदहे की तरह था। Equus उत्तरी अमेरिका के जंगलो से संभवतः आए थे। फासिल्स विशेषज्ञों द्वारा इसे नाम दिया Eohippus – the dawn horse प्रारम्भिक घोड़ा। लगभग 10000 ईसा पूर्व इस तरह के Dawn horses दूसरे प्राणियों जैसे मैमथ की भांति विलुप्त हो गए। निश्चित रूप से इनकी विलुप्ति का कारण बता पाना मुश्किल है। संभवतः पर्यावरणीय परिवर्तन एवं मानव द्वारा किए जाने वाले शिकार के कारण इनका लोप हो गया होगा। रामायण में वर्णित घटनाक्रम के काल निर्धारण में हमें उपरोक्त तथ्यों से कुछ सहायता प्राप्त हो सकती है। Terrier का विकास अब तक Dawn horses की तरह हो चुका था और इसकी प्रजाति अब प्रायः लुप्तप्राय थी। अतः राजाओं के उपयोग के लायक ही बची थी। एक बात और है कि इसके आकार के कारण इसे प्रायः ’खर’ ही कहा जाता था। किंतु इसकी विकसित नस्ल को कुछ लोग तुरंग (तुर+गम्+ खच+ मुम्) कहने लगे थे। अतः Terrier Dawn horses को ’खर’/तुरंग मान सकते है। ’तुर’ उपसर्ग गम् धातु के गमनार्थक अर्थ को गति प्रदान करता है। तुर्+गम्+खच्+मुम्, तुर-तुरेण वेगेन उदाहरण – तुरग खुर हतस्तथा रेणुः (अभि0शाकु0/कालिदास 1/28) लेकिन यह गतिशीलता आधुनिक अश्व की तरह तो निश्चय ही नही रही होगी। यदि हम उपरोक्त तथ्य पर सहमत हों कि रावण के रथ में अरण्यकाण्ड में जुतने वाला ’खर’ और युद्धकाण्ड में रथवाहक बनने वाला ’’तुरंगम’’ वस्तुतः एक ही है और वह है Terrier का वशंज Dawn horses जो कि उस समय अपनी अन्तिम् पीढ़ी के द्वारा रावण को अपनी सेवा दे रहा है तो हम राम अथवा रावण के स्थितिकाल को 10000 ई0पू0 की एक सीमा रेखा के अन्दर रख सकते हैं।(….अनवरत्)

©तृषा’कान्त’ 
(नोट:- तृषाकान्त की ओर हम यह अनुरोध करेंगे की कृपया तथ्य एवं विचारपूर्ण असहमति से अवगत कराएं ताकि एक प्रभावी शोध में सहायता प्राप्त हो) 

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