राम मिथ या इतिहास…भाग – 5 [आलेख] – शिवेन्द्र कुमार मिश्र

….हमें अपनी प्राचीनतम हिन्दू संस्कृति पर इसलिये सदैव गर्व रहा है कि हम कूप मण्डूक नहीं रहे हैं। ज्ञान की पिपासा को शांत करने के उद्देश्य से स्वस्थ चिन्तन मनन एवं मर्यादापूर्ण सहिष्णु शास्त्रार्थ हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग रहे हैं। इसी के आलोक में ..विचार करते हुये हमें ध्यान है कि मर्यादा पुरूषोत्तम राम सदैव हमारे आराध्य देव हैं .. राम के बिना हम भारतीय संस्कृति की कल्पना भी नहीं कर सकते।सहस्त्रों वर्षों से भगवान राम के विषय में अधिकाधिक जानने की उत्कंठा हमारे मन में रही है। अनेक ज्ञानी महानुभावों ने अपने अपने ढंग से यह प्रयास किया है। किन्तु एक साधारण मानव मस्तिष्क में कुछ सहज प्रश्न उठने स्वाभाविक हैं । इस आलेखमाला का उद्देश्य यही है कि इन बिन्दुओं पर बिना किसी पूर्वाग्रह के मात्र तथ्यों के आलोक में एक स्वस्थ चिन्तन करें। आपके विचार और तथ्यपूर्ण आलोचना के लिए अग्रिम आभार – तृषाकान्त

(5) रावण का प्रेतकर्म
विगत अंको में आपने ’’रामायण में अश्व’’ पर परिचर्चा को पढ़ा। इस अंक में मैं एक अन्य दृष्टि से इस विषय को प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा। रामायण युद्ध काण्ड सर्ग 111 श्लोक संख्या 108 से 118 रावण की शवयात्रा एवं दाह संस्कार से संबंधित है। इन श्लोकों में से कुछ श्लोक ही विषय की दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण है। 112:- आगे जाकर रावण के विमान को एक पवित्र स्थान में रखकर अत्यन्त दुखी हुए। विभीषण आदि राक्षसों ने मलय, चन्दन, काष्ठ, पदमक्, उशीर, खस तथा अन्य प्रकार के चन्दनों द्वारा वेदोक्त विधि से चिता बनाई और उसके ऊपर रंकु नामक मृग का चर्म विछाया।’’ 114-115- उसके ऊपर राक्षसराज के शव को सुलाकर उन्होने उत्तम विधि से उसका पितृ मेध किया (दाह संस्कार) उन्होने चिता के दक्षिण पूर्व में वेदी बनाकर उस पर यथास्थान दधिमिश्रित घी से भरी हुई स्रुवा रावण के कंधे पर रखी और जांघो पर उलूखल रखा। 116:- काष्ठ के सभी पात्र, अरणि, उत्तराणि और मूसल आदि को भी यथा स्थान रखा। 117-118:- वेदोक्त विधि और महर्षियों द्वारा रचित विधि से वहां सारा कार्य हुआ। राक्षसों ने मेध्य पशु का हनन करके राजा रावण की चिता पर फैलाए मृगचर्म को घी से तर करके फिर रावण के शव को चन्दन और फूलों से अलंकृत करके वे राक्षस मन ही मन दुख का अनुभव करने लगे। 119:- फिर विभीषण के साथ अन्यान्य राक्षसों ने भी चिता पर नाना प्रकार के वस्त्र और लावा बिखेरे ………………। मैं उपरोक्त में से कुछ तथ्यों को अलग करता हूँ:- 1- रंकु नामक मृग का चर्म विछाना (श्लोक 112) 2- दधिमिश्रित घी से भरी श्रुवा रावण के कंधे पर व उलूखल जांघों पर रखना (115) 3- काष्ठ के सभी पात्र अरणि, उत्तराणि और मूसल आदि को यथा स्थान रखना (116) 4- मेध्य पशु का हनन करके राजा रावण की चिता पर ………….. मृगचर्म को घी से तर करके …………….. राक्षस मन ही मन दुःख का अनुभव करने लगे। कृपया प्रस्तुत तथ्यों को पुनः ध्यान से पढ़िए। पुनश्च डा0 बाबा साहब अंबेडकर द्वारा अपनी पुस्तक “The untouchables” हिन्दी अनुवाद’’ अछूत कौन और कैसे द्वारा आचार्य जुगुल किशोर बौद्ध में मृत क्रिया कर्म के संबंध में ’’आश्वलायन गृहसूत्र’’ से उल्लिखित इस क्रिया कर्म से तुलना करिए। (अछूत कौन और कैसे – डॉ0 बी.आर. अम्बेडकर अनुवादक (जुगुल किशोर बौद्ध) – पृष्ठ 89 से 90 अध्याय – क्या हिन्दुओं ने गौ मांस कभी नही खाया।) आश्वलायन गृहसूत्र 1. उसे तब निम्नलिखित (बलि के) औजारों को (मृत के शव पर) रख देना चाहिए। (यह यज्ञ-साधन है) 2. दाहिने हाथ में (चम्मच कहा जाने वाला) गुहु। 3. बाएं हाथ में (दूसरा चम्मच जिसे कहते हैं) उपभृत। 4. दाहिनी ओर स्फ्य कहा जाने वाली लकड़ी की बलिकर्म वाली खड्ग (तलवार), उसके बांई ओर अग्निहोत्री हवनी (अर्थात कलछी जिसके द्वारा अग्निहोत्र बलि का चढ़ावा चढ़ाया जाता है)। 5. उसकी छाती पर ध्रुवा (बलिकर्म की बड़ी जो कलछी कहलाती है)। उसके सिर पर पकवान। उसके दांतो में ठूंसे जाने वाले पत्थर। 6. नाक के दोनो ओर, छोटे बलिकर्म की कलछियां जिन्हें स्त्रुवा कहते हैं। 7. अथवा, यदि केवल एक स्त्रुवा उपलब्ध है, इसे तोड़कर (दो भाग करें)। 8. उसके दोनो कानों पर दो प्रसित्रहरण (अर्थात वे बर्तन, जिनमें ब्राहम्णों का बलि भोजन) रखा जाता है। 9. अथवा, यदि केवल एक प्रसित्रहरण है, इसे तोड़ दिया जाए (दो टुकड़ो में)। 10. पेट पर पत्री नामक बर्तन। 11. चपक (कप) जिसमें कटे हुए (बलि का भोजन) रखे जाते हैं। 12. उसके गुप्तांग पर सामी नाम की लाठी। 13. उसकी जंघाओ पर जलती लकड़ियां। 14. उसकी टांगो पर खल्ल (गारा) और मूसल। 15. उसके पैरों पर दो टोकरियां। 16. अथवा, यदि केवल एक (टोकरी) है, इसे तोड़कर दो भाग कर लिया जाए। 17. वह औजार जिनमें सूराख हैं (जिसमें तरल पदार्थ उडे़ले जा सकते हैं) छिड़काए गए मक्खन से भर लिए जाएं। 18. (मृतक का) पुत्र अपने लिए चक्की के नीचे और ऊपर के पाट ले ले। 19. तांबे, लोहे और मिटटी के बने औजार। 20. किसी मादा-पशु का झिल्ली (व्उमदजनउ) निकालकर उससे सिर और मुख (मृत व्यक्ति का) ढांक दे। (ऋग्वेद दस 16.7) का यह श्लोक पढ़े ’किन्तु अग्नि के विरूद्ध (जो तेरी रक्षा करेगा) कवच की गऊओं से प्राप्त होता है। 21. पशु के आंड (अण्डकोष) लेकर, वह उन्हें (मृत व्यक्ति के) हाथों में डाल दे, इस श्लोक (ऋग्चेद दस 14.10) के साथ शमीम के पुत्रों, दोनो कुत्तों से बचे दाहिना गुर्दा दाहिने हाथ में और बायां गुर्दा बाएं हाथ में हो। 22. पशुओं का हृदय मृतक के हृदय पर रख दें। 23. और कुछ आचार्यों के अनुसार आटे या चावल के दो पिंड। 24. केवल जब यदि आचार्य के अनुसार अंडकोष न हों। 25. पूरे (पशु के) अंग-अंग बांटने के बाद (इसके भिन्न-भिन्न अंग मृतक के वैसे ही अंगो पर रखकर) और उसे खाल से ढांक कर, वह उच्चारण करता है। हे अग्नि ! जब प्रणीता जल आगे ले जाया गया है तो इस कप को उलट मत देना’ (ऋग्वेद दस 16.8)। 26. अपने बांए घुटने को झुकाकर उसे बलि का चढ़ावा (नैवेद्य) दक्षिणा को अग्नि में इस मंत्र के साथ डालना चाहिए ’अग्नेय स्वाहा, कामाय स्वाहा, लोकाय स्वाहा, अनुमतये स्वाहा’। 27. (नैवेद्य) का पांचवा भाग मृतक के वक्ष पर इस मंत्र के साथ, ’निश्चय ही इससे हजारों का जन्म हुआ है। अब वह इसमें से पैदा हो स्वर्ग के लिए स्वाहा।’ आश्वलायन गृहसूत्र से उद्धृत ऊपर के परिच्छेद से यह स्पष्ट है कि प्राचीन इंडो-आर्यों में जब कोई व्यक्ति मर जाता था, एक पशु को मारा जाता था और शव को जलाने से पूर्व पशु के भागों को मृतक व्यक्ति के शरीर पर सभी भागों पर रखा जाता था।’’ यदि आश्वालयन गृहसूत्र में वर्णित उपरोक्त क्रिया से रामायण की दाह क्रिया की तुलना करें तो काफी कुछ समानता दिखाई देती है। इतना ही नही क्रमांक-23 इस शव निस्तारण की आदिम कर्मकाण्डीय प्रक्रिया को हिन्दुओं में प्रचलित आधुनिक शवदाह की प्रक्रिया से भी जोड़ता है। (अनवरत्)
©तृषा’कान्त’

Advertisements

1 टिप्पणी (+add yours?)

  1. arvind pathik
    अप्रैल 21, 2012 @ 11:16:18

    surajprakash ji ke sampadkiy ka intezar rahega.

    प्रतिक्रिया

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: