रंगों की फुहार

रंगों की फुहार
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बहे बसंती बयार ,आया होली का त्यौहार,
हरसू छाई बहार ,उडे रंगों की पतंग.

गौरी करके सिंगार ,मांगे प्रीतम का प्यार,
कोई करे मनुहार ,और कोई करे तंग.

पिचकारी की कतार, हुई रंगों की बोछार,
नाचे गाएं बार बार,बाजे ढोल और मृदंग.

गावे कवित्त और फाग,बस चढ़ रहा खुमार,
गले भंग लो उतार,थोड़ा कर लो हुडदंग!

भीजे रंगों में तन, मन में प्रेम की फुहार,
करो सब को शुमार,रंगो होली के रंग.

-अल्पना वर्मा