निजी एयरलाइन को जनता के पैसे की रेवड़ी.. [समाचार प्रतिक्रिया] – श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’

क्या भविष्य में किसी निजी कम्पनी के स्वामियों द्वारा ऐयाशी करते हुये उसे दुरूह स्थिति में पहुंच जाने पर व्यक्तिगत सरकारी सम्पर्क के बल पर जनता के पैसे से कम्पनी को उसके हाल पर छोड़ कर पुन: उसी ऐयाशी में सलग्न हो जाने का रास्ता खुल चुका है

निरंकुश स्वामित्व और प्रबन्धन को उसके किये गलत निर्णयों का दण्ड मिलने के स्थान पर पुरस्कार दिया जा रहा है। आर्थिक दुष्प्रबन्धन का इससे बड़ा कोई अन्य उदाहरण नहीं मिलेगा

कोई व्यवस्था इस देश में है .. वेतन पर्ची से अग्रिम टैक्स देनेवाला वेतनभोगी व्यक्ति टैक्स देते देते मरा जा रहा हूं। उसके बच्चों के साधारण खर्चों के लिये, रसोई सहजता से चलाने के लिये तथा घर बनाने के लिये पैसे नहीं हैं और सरकार अपने मित्रों को कर्ज़ के नाम पर उदारता से पैसे बांट्ती जा रही है । कम्पनी अपनी ऐयाशी से पुन: उसी स्थिति में नहीं पहुंच सकती .. ??

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