अथ श्री नारायण कथा .. [ आलेख ] – श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’


..एनडी तिवारी के खून का नमूना लिया गया—

 ….उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पहलीबार सम्भवत: 1974-75 में संजय गान्धीके पैर छूते हुये उस आयु में देखा गया था जब वह इन्दिरा गान्धी की आयु के समकक्ष थे.. वह प्रसंग राजनीत हलकों में मुख्यमन्त्री पद की गरिमा के साथ बहुत सारी टीका टिप्पणी के साथ शान्त हुआ। नारायण जी ने कहा मैं इन्दिरा जी को बहन मानता हूं अत: श्री सन्जय गान्धी मेरे भांजे हैं। ब्राह्मण समुदाय में भांजे के पैर छूने की प्रथा को आगे लाकर उस विषय को किसी तरह शान्त किया गया था। वास्तविकता क्या थी वह सब जानते थे किन्तु उत्तर प्रदेश की जनता ने पहली बार अपने आपको लज्जित अनुभव किया था। उसके बाद देश में आपात स्थिति सहित जो भी हुआ वह .. इतिहास है । ……. एक और घटना नारायण कथा के अनेक प्रसंगों में से उल्लेखनीय है। पहली बार देश का कोई मुख्यमन्त्री दिल्ली से सड़क मार्ग से कार द्वारा निकला। सुधी मित्रों को अधिक स्मरण हो तो रास्ते में ही किसी ढाबे पर अथवा किसी अन्य ऐसे ही किसी स्थान पर अपनी सुरक्षा में सन्नद्ध कर्मियों को धता बताकर गायब हो गये। यह विगत समय के अरूणाचल एवं आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमन्त्री के हेलीकाप्टर के गायब होने वाली घटनाओं से कहीं अधिक बड़ी घटना थी। देश के सबसे बड़े प्रांत उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री लापता। सारे देश में लगभग लगभग हाहाकार मच गया। पुलिस से लेकर सुरक्षा तन्त्र की सभी एजेन्सियां खोजने में जुट गयीं। सम्भवत: साढ़े तीन घण्टे के उपरान्त मुख्य मन्त्री जी स्वयमेव प्रकट हो गये कि किसी रिश्तेदार के यहां मिलना था सो चले गये। गोया मुख्यमन्त्री पद पर पदासीन कोई जिम्मेदार व्यक्तित्व न होकर शेखचिल्ली मियां थे जो जिधर मन किया मुंह उठाया चल दिये। सम्भवत: सम्मेलन के स्थान पर कहीं कोई गोपनीय सम्मिलन कार्यक्रम था जो अगले दिन सभी समाचार पत्रों में सुर्खियों के साथ छपा था। ऐसे ही महान व्यक्तित्व की अनगिनत महान गाथायें हैं इतिहास बनाने के लिये … उनके पौरूष पर चर्चा भी सुर्खियों में रही है । बात कुछ अशोभनीय हो जायेगी .. अत: सभी बचे खुचे बुज़ुर्गों की इज़्ज़त का ध्यान करके अब मुंह बन्द कर लेना ही उचित है। अथ श्री नारायण कथा ।

©तृषा’कान्त’