पाकिस्तान की दुखद हकीकत .. [ समाचार प्रतिक्रिया] – श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’

आज पाकिस्तान फिर से ज़म्हूरियत और सैन्य शासन के दोराहे पर खड़ा है। उसकी इस स्थिति के लिये एक राष्ट्र के तौर पर खुद पाकिस्तान की मानसिकता के अतिरिक्त कोई अन्य वजह जिम्मेदार भी नहीं है। जिस देश के राष्ट्रपति, पूर्व राष्ट्रपति से लेकर प्रधान मंत्री तक को अपनी सत्ता और कई बार अपने जीवन के अभयदान हेतु सऊदी जाकर भीख जैसी मांगनी पड़ती है वहां किसी भी सार्थक लोकतन्त्र के लिये कभी कोई स्थान हो भी नहीं सकता।

पाकिस्तान में जम्हूरियत का अर्थ सिर्फ़ हिन्दुस्तान के प्रति नफरत है .. वो पाकिस्तान जो अपने जन्म से पूर्व मात्र कूछ दशक पहले तक हिन्दुस्तान हुआ करता था। दुर्भाग्य से अपने सहोदर भारत के साथ शांति तथा सहअस्तिव को निरन्तर नकारते हुये कल तक अमेरिका और आज चीन सहित वह किसी भी अन्य देश के आगे बेशर्मी से गिड़गिड़ाने को तैयार है। भारत के साथ घृणा को ज़िन्दा रखने के लिये .. उसे सम्भवत: आने वाले दिनों में इसकी और भी भारी कीमत चुकाने के लिये तैयार रहना होगा। बदनसीब है पाक .. जो आज तक इस साधारण सी बात को समझ कर भी नज़रअन्दाज करता रहता है।

खुदा खैर करे .. !!
©तृषा’कान्त’

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