मेरा आदर्श भी वही है … तुम नहीं राम ..!! [कविता] – रश्मि भारद्वाज

हे राम !
जानते हो तुमसे
क्यों नहीं मांगी
किसी ने अग्निपरीक्षा…..!!??
क्योंकि ये अगाध प्रेम था किसी का
जो नहीं देख सकता था खड़ा
तुम्हें प्रश्नो के दायरे में
जो नहीं चाहता था
खंडित हो तुम्हारी छवि
मर्यादा पुरुषोतम की
इतना निश्चल प्रेम
ईश्वर बना दिया तुम्हें ….!!!!
और ये कैसा प्रेम तुम्हारा
जिसे थी प्रमाण की दरकार
दुनिया के लिए…..!!!

ये कैसा ईश्वरत्व तुम्हारा….!!??
जिसे बचाने के लिए
कर गए परित्याग भी तुम
हमेशा के लिए ………..
साबित कर दिए दुनिया के इल्ज़ाम
वह भी तब
जब सिर्फ तुम्हारी जरूरत थी उसे
तब कैसे पाओगे
तुम भी वह प्रेम……!!!
जो तुम्हारा था कभी
उसे तो जाना ही था
धरती के गर्भ में
आज से सदियों पहले ही
कर गया कोई
अपनी अस्मिता को
बचाने की पहल
प्रेम में होने के बाद भी …….
मेरा आदर्श भी वही है राम
तुम नहीं ……………..!!

 रश्मि भारद्वाज
©तृषा’कान्त’

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